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सूचना भवन, देवघर, जिला जनसम्पर्क कार्यालय, दिनांक -31/05/2020

सूचना भवन, देवघर
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जिला जनसम्पर्क कार्यालय
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प्रेस विज्ञप्ति संख्या-966
दिनांक -31/05/2020
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■ तंबाकू निषेध दिवस पर हम सभी को जागरूक और सचेत होने की आवश्यकता:- उपायुक्त....
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उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्रीमती नैंसी सहाय द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर तम्बाकू के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को विशेषकर युवाओं को जागरूक और सचेत रहने का आग्रह किया है। इसके अलावे उन्होंने कहा है कि मनुष्य द्वारा तम्बाकू का प्रयोग करना अपने आप को धीरे-धीरे खत्म करने के सामान है। इसके प्रयोग से मनुष्य कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, सास का फूलना तथा रक्त-प्रवाह में गड़बड़ी जैसी बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है। हमारे वैज्ञानिकों ने तम्बाकू में 16 घातक तत्व बताएं है जिनमें दो सबसे खतरनाक होते है- निकोटिन व बेजोपायरिन निकोटिन। जो न केवल सेवन करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते है बल्कि आसपास में बैठे मौजूद लोगों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है, विशेषकर महिलाएं व बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित होते है। जन साधारण को इससे बचने के लिए अपनी सोच मानसिकता और व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा।

आज राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सरकार तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा मनुष्य को स्वस्थ जीवन जीने के लिए निरन्तर प्रेरित किया जाता है। मनुष्य के इस अनमोल जीवन को स्वस्थ रखने की इसी श्रृंखला में प्रति वर्ष 31 मई का दिन विश्व स्तर पर तम्बाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य तम्बाकू के प्रयोग से होने वाले खतरों के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है और अपने आस पास के वातावरण को धूम्रपान मुक्त बनाना है। आज से इसी कड़ी में अपने आसपास के लोगों को जागरूक करते हुए एक छोटी सी पहल करते है और धूम्रपान और तंबाकू को नो कहते हैं। वर्तमान में धूम्रपान और तंबाकू पूर्ण रूप से निषेध किया गया है। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माने व कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।

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#StayHomeStaySafe
#CleanDeogharGreenDeoghar
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#TeamPRD(Deoghar)


सूचना भवन, देवघर
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जिला जनसम्पर्क कार्यालय
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प्रेस विज्ञप्ति संख्या-967
दिनांक -31/05/2020
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■ लॉकडाउन के वजह से अपने घर के बिगड़ते हालात को बेहतर करने के जुनून को सलाम:- उपायुक्त....
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■मिर्च की खेती कर मिसाल कायम करती स्वयं सहायता समूह की दीदियां....
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■ जैविक कृषि-बागवानी से जोड़े अपने घर और परिवार को:- उपायुक्त....
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उपायुक्त श्रीमती नैंसी सहाय के द्वारा जानकारी दी गयी कि वर्तमान में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु लागू तालाबंदी के दौरान आर्थिक कामकाज एवं बाजार बंद हो जाने के कारण गांव के गरीब तबकों को खासतौर पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अत्यंत ही बुरा असर पड़ा है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा जेएसएलपीएस के माध्यम से सखी मंडल की महिलाओं को स्वरोजगार करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे अपने घरों में हीं सुरक्षित रहते हुए स्वरोजगार कर कुछ आमदनी कर सकें। इसी कड़ी में देवघर जिला के पालोजोरी प्रखंड के सगरभंगा गांव में रहने वाली सलिता देवी एवं कपूरा देवी ने तालाबंदी के दौरान गांव की आजीविका कृषक मित्र आशा देवी के मदद से कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए जैविक विधि से मिर्च की खेती की एवं विगत दो महीनों में इन्होंने लगभग एक क्विंटल मिर्च का उत्पादन‌ किया। इससे इन्हें लगभग ₹30,000 की आमदनी हुई एवं उस पैसे से ये अपने घर-परिवार को अच्छी तरह चला पा रही हैं। सिर्फ इतना हीं नहीं ये मिर्च के अलावा अपने खेतों में अन्य साग-सब्जियों की भी खेती कर रही हैं एवं दूसरे महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश की है। लॉक डाउन के वजह से अपने घर के बिगड़ते हालात को बेहतर करने के जुनून ने इन्हें आत्मनिर्भर बनाया एवं अब ये अपने परिवार का सहारा बन रही हैं।

सफल किसान बनने की बात पर इन्होंने कहा कि ''पहले कभी खेती के बारे में नहीं सोचती थी, लेकिन परिस्थितिवश जब काम करने की नौबत आयी तो मन लगाकर घर पर ही मिर्च की खेती की, जिसके फलस्वरूप आज अपने खेतों में उपजाये मिर्च को बेचकर मैं स्वयं पैसे कमा रही हूँ और अपने घर में सहयोग कर रही हूँ।''

■ उपायुक्त ने की जिलावासियों से अपील....
इस दिशा में उपायुक्त श्रीमती नैंसी सहाय ने आग्रह करते हुए कहा है कि सभी नागरिक एवं हर वर्ग के लोग जैसे बच्चे-बड़े, महिलायें -पुरुष, युवा-बुजुर्ग छोटे से बड़े स्तर पर जैविक कृषि-बागवानी से जुड़कर एक कदम स्वच्छता और हरियाली की ओर बढ़ा सकते हैं। इसके अलावे उन्होंने कहा कि आज जहाँ स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद दीदी की आर्थिक स्थिति सिर्फ बेहतर हीं नही हुई है बल्कि वे अपने साथ-साथ अपने परिवार के लोगों के भी जीवनस्तर में सुधार लायी हैं और इसका जीता-जागता उदाहरण ये दीदी हैं, जो कि अपने मेहनत, लग्न और सफलता से अन्य सभी महिलाओं को भी प्रेरित करने का काम किया है।

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#TeamPRD(Deoghar)


सूचना भवन, देवघर
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जिला जनसम्पर्क कार्यालय
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प्रेस विज्ञप्ति संख्या-968
दिनांक -31/05/2020
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■ उपायुक्त ने टिड्डी दलों के हमले की आशंका को लेकर कृषि पदाधिकारी व कृषि विभाग को अतिरिक्ति सतर्कता बरतते हुए एक्टिव रहने का दिया निर्देश....
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■ टिड्डी दलों से बचाव व जरूरी किटनाशकों की जानकारियों से अवगत करायें, जिले के किसानों को....
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■ इससे जुड़ी जानकारी हेतु किसान काॅल सेंटर या जिला कृषि पदाधिकारी से करें संपर्क....
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टिड्डी दल के हमलें की आशंका को लेकर उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी श्रीमती नैन्सी सहाय ने कृषि विभाग व कृषि पदाधिकारी को अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए पूर्ण रूप से एक्टिव रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावे उन्होंने इसके बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इसकी लगातार निगरानी करने का निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिया है। साथ हीं कृषि वैज्ञानिक केन्द्र, सुजानी के वैज्ञानिकों व अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए इससे निपटने को लेेकर आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया है।

■ खेतों में टिड्डी दल के हमलें को रोकने हेतु यह करें उपाय...
टिड्डी दल के हमले से बचने के लिए खेतों में धुआं किया जाए। इससे टिड्डी रुकता नहीं है। खेत में पानी भरने से भी टिड्डी बैठ नहीं पाती। सुबह पांच बजे से आठ बजे के बीच कलोरपाईरीफोस 20 प्रतिशत ई०सी० या लम्बडा, साईहसोथरीन पांच प्रतिशत ईसी के छिड़काव भी किया जा सकता है। इसके अलावा किसान सामूहिक रूप से गांव व क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग कर भगा सकते हैं। साथ हीं आग जलाने, पटाखे फोडने, थाली, टीन पीटने, ढोल व नगाड़े बजाने से भी ये भाग जाते हैं। तेज ध्वनि को ये कीट बर्दाश्त नहीं कर पाते।

■ इन रसायनों का कर सकते है छिड़काव....
फसलों में यदि टिड्डियों को प्रकोप बढ़ गया हो तो कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके भी इनकों मारा जा सकता है। टिड्डी प्रबंधन हेतु फसलों पर नीम के बीजों का पाउडर बनाकर 40 ग्राम पाउडर प्रति लीटर पानी में घोल कर उसका छिड़काव किया जाय तो दो-तीन सप्ताह तक फसल सुरक्षित रहती है।

इसके अलावा बेन्डियोकार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम या क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली या क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 प्रतिशत एससी 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम को 500-600 लीटर पानी मे घोल कर प्रति हैक्टेयर अर्थात 2.5 एकड़ खेत मे छिड़काव करना होगा।

■ आखिर क्या है टिड्डी और कैसे पहुँचाते है नुकशान....
टिड्डी दो से ढाई इंच लम्बा कीट होता है। यह डरपोक होने के कारण समूह में रहते हैं। टिड्डी दल किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है। यह एक दिन में 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं। झुंड में यह पेड़-पौधे एवं वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में फसल के पत्तियों को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर सकते हैं। टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम छह से आठ बजे के आस-पास पहुंचकर जमीन पर बैठ जाते हैं। या फिर पेड़ों, झाडियों एवं फसलों पर बसेरा करते हैं। वहीं पर रात गुजारते हैं तथा फसल को खाकर नुकसान पहुंचाते। फिर सुबह आठ से नौ बजे के करीब उड़ान भरते हैं।

जानकारी व सहायता के लिए किसान काॅल सेंटर के अलावा निम्नलिखित नंबरों पर काॅल कर सकते हैं-
इसके अलावे इनसे जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी एवं सहायता के लिए किसान कॉल सेंटर टोल फ्री नंबर - 18001801551 या जिला कृषि पदाधिकारी, देवघर श्री रामा शंकर प्रसाद सिंह मोबाइल नंबर 9431427940 पर काॅल करके जानकारी प्राप्त कर सकते है। साथ हीं वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान कृषि विज्ञान केन्द्र, सुजानी, देवघर 9430320305 के अलावा पौध संरक्षण निरीक्षक श्री मनीष कुमार 9431320284 पर सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते है।

■ टिड्डी दल से अपने खेत को बचाने के कारगर तरीके....
● खेतों में एक साथ मिलकर आग जलाकर पटाखे फोड़ें।

● बलुई मिट्टी वाले खेत टिड्डी दल की पसंद हैं। ये हमेशा बलुई मिट्टी में अंडे देता है, ऐसे में इन खेतों को खाली न रहने दें, जोत दें।

● खेतों में पानी भर दें, जिससे प्रजनन और अंडे देने की कोई गुंजाइश न रहे।

● थाली-खाली टिन को जोर से पीटें, ढोल नगाड़े बजाकर तेज आवाज करें, इससे भी ये कीट भाग जाता है।

● टिड्डियों का दल आवाज के कंपन को महसूस करता है। इस कारण आजकल इन्हें भगाने के लिए डीजे का भी प्रयोग किया जाने लगा है। यह आवाज को दूर से भांपकर अपना रास्ता बदल लेते हैं अथवा खेतों से उडकर दूर चले जाते हैं।

● इसके अलावा फसलों को टिड्डी दल के हमले से बचाने के लिए हेस्टाबीटामिल, क्लोरफाइलीफास और बेंजीएक्सटाक्लोराइड का खेतों में छिडकाव करना चाहिए।

● खाली पड़े खेतों में टिड्डी दल अंडे देता है। जिन्हें नष्ट करने के लिए खेतों में गहरी खुदाई की जानी चाहिए और फिर इनमें पानी भर देना चाहिए।

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